केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम में ’यंग उत्तराखण्ड लीजेंडरी सिंगर अवार्ड 2022 से सम्मानित हुई वीना तिवारी..

केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम में ’यंग उत्तराखण्ड लीजेंडरी सिंगर अवार्ड 2022 से सम्मानित हुई वीना तिवारी..
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 केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम में ’यंग उत्तराखण्ड लीजेंडरी सिंगर अवार्ड 2022 से सम्मानित हुई वीना तिवारी..

          देहरादून। आज 30 अप्रैल को वीना तिवारी को ’केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम में ’यंग उत्तराखण्ड सिने अवार्ड 2022 ’ के अन्तर्गत ’यंग उत्तराखण्ड लीजेंडरी सिंगर अवार्ड 2022’ प्रदान किया जा रहा है।
             विस्मृत सी हो चुकी इस लोकगायिका को इस संस्था द्वारा याद किया गया , इसके लिए संपूर्ण जूरी के सदस्यों के प्रति आभार तो बनता ही है। हकीकत तो ये है कि लोग कलाकार के व्यक्तित्व को लोग भले भूल जायें, लेकिन उनका समाज को जो अवदान रहता है, वह कभी भूला नहीं जाता । वीना तिवारी का नाम भले लोग भूल जायें, लेकिन ’छाना बिलोरी ’ गीत तो उनकी पहचान जीवन्त रखेगा ।
           मॉ शारदे की वरद्पुत्री वीना तिवारी के गीतों के स्वरों में जो मिठास और सरसता है , लोकव्यवहार में भी वह उतनी ही सहज, सरल , सौम्य , मृदु भाषी एवं आत्मीयता से परिपूर्ण है । अपने लोगों से सदैव अपनी ही लोकभाषा में बात करना कुमाउनी के प्रति उनके अगाध स्नेह को दर्शाता है । हम उनके स्वस्थ एवं चिरायु जीवन की कामना करते हैं, ताकि लम्बे समय तक वे संगीत प्रेमियों का मार्गदर्शन व प्रेरणा देती रहें ।

               पेशे से संगीत शिक्षिका वीना तिवारी ने न केवल कुमाउनी लोकगीतों को अपने सुमधुर स्वर से झंकृत किया बल्कि, गढ़वाल की प्रचलित लोकगाथा ’ रामी बौराणी’’के पार्श्व गायन सहित कई लोकगीतों को उसी अधिकार पूर्वक गाया, जिस तरह कुमाउनी लोकगीतों में उनकी पकड़ थी। वर्ष 1964 से शुरू हुआ संगीत का उनका सफर अनवरत् जारी है और उम्र के इस पड़ाव में भी हम उनसे लोकसंगीत की दशा व दिशा पर मार्गदर्शन की अपेक्षा करते हैं । न केवल लोकगीतों तक उनका गायन सीमित रहा बल्कि आकाशवाणी रामपुर से कई गीत व गजल भी उन्होंने गाये । लेकिन दुख इस बात का है कि वे इनका संग्रह नहीं कर पायी।
           आज की तरह उस समय ध्वन्याकंन की सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थी , आकाशवाणी द्वारा मैग्नेटिक टेप ’ पर गीतों की रिकार्डिंग होती थी, जो आकाशवाणी के संग्रहालय तक ही सीमित रहती । कैसिट का दौर तो अस्सी के दशक में आया। वीना तिवारी को खुद याद नहीं कि उन्होंने कितने गीत आकाशवाणी से गाये, एक अनुमान के अनुसार वे बताती हैं कि लगभग चार-पांच सौ गीत तो उन्होंने गाये ही होंगे ।

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