तुंगनाथ घाटी पर्यटन व्यवसाय पर निर्भर रहने वाले स्थानीय युवाओं के भविष्य पर हो सकता है संकट खड़ा… रिपोर्ट-  लक्ष्मण नेगी

तुंगनाथ घाटी पर्यटन व्यवसाय पर निर्भर रहने वाले स्थानीय युवाओं के भविष्य पर हो सकता है संकट खड़ा… रिपोर्ट-  लक्ष्मण नेगी
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तुंगनाथ घाटी पर्यटन व्यवसाय पर निर्भर रहने वाले स्थानीय युवाओं के भविष्य पर हो सकता है संकट खड़ा... रिपोर्ट-  लक्ष्मण नेगी

                 ऊखीमठ। तुंगनाथ घाटी के अन्तर्गत बनियाकुण्ड में सीमांकन को लेकर ग्राम पंचायत मक्कू व उषाडा के ग्रामीण आमने – सामने आने से तुंगनाथ घाटी एक बार फिर चर्चाओं में आ गयी है। सीमांकन को लेकर यदि दोनों गांवों का विवाद भविष्य में भी इसी तरह जारी रहता है तो दोनों गांवों के ग्रामीणों ने मध्य आपसी मतभेद होने के साथ तुंगनाथ घाटी का तीर्थाटन – पर्यटन व्यवसाय खासा प्रभावित हो सकता है। दोनों गांवों के मध्य सीमांकन को लेकर चल रहे विवाद में यदि प्रशासन हस्तक्षेप करता है तो भविष्य में तुंगनाथ घाटी पर्यटन व्यवसाय पर निर्भर रहने वाले स्थानीय युवाओं के सन्मुख दो जून रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। बता दें कि तुंगनाथ घाटी के सुरम्य मखमली बुग्यालों में विगत पांच वर्षों में रिकार्ड तोड़ अतिक्रमण हुआ है। तुंगनाथ घाटी के सुरम्य मखमली बुग्यालों में अवैध अतिक्रमण करने में बाहरी पूजीपति भी पीछे नहीं रहे है परिणाम स्वरूप आज भी तुंगनाथ घाटी में बाहरी पूंजीपतियों का खासा बोल – बाला है।

           तुंगनाथ घाटी के सुरम्य मखमली बुग्यालों में विगत पांच वर्षों में अवैध अतिक्रमण होने से बुग्यालों की सुन्दरता गायब होने के साथ अतिक्रमण के नाम पर अवैध वृक्षों के पावन के साथ अवैध अतिक्रमण भी होता रहा। तुंगनाथ घाटी के सुरम्य मखमली बुग्यालों में हुए अवैध अतिक्रमण का संज्ञान लेते हुए वर्ष 2018 में तत्कालीन एडीएम गिरीश गुणवत्त व वन विभाग के अधिकारियों को तत्काल तुंगनाथ घाटी के सुरम्य मखमली बुग्यालों से अतिक्रमण हटाने का फरमान जारी किया था। जिला प्रशासन व वन विभाग का फरमान जारी होते ही तुंगनाथ घाटी में सन्नाटा पसर गया था तथा स्थानीय युवाओं को भविष्य की चिन्ता सताने लग गयी थी।विगत वर्ष मई माह में तहसील प्रशासन, वन विभाग तथा दोनों गांवों के ग्रामीणों की मौजूदगी में तुंगनाथ घाटी के बनियाकुण्ड में सीमांकन किया गया था जिसमें उषाडा के ग्रामीणों ने सीमांकन पर नाराजगी व्यक्त की थी। विगत 14 मार्च को मक्कू गाँव के ग्रामीणों के शिष्टमंडल ने बनियाकुण्ड पहुंचकर वन पंचायत मक्कू की भूमि में व्यवसाय कर रहे उषाडा गाँव के युवाओं को बुग्याल खाली करने को कहा था मगर बुधवार को दोनों गांवों के कई दर्जनों ग्रामीण आमने – सामने हो गये हैं।
            मक्कू गाँव के ग्रामीणों का कहना है कि बनियाकुण्ड में वन पंचायत मक्कू की भूमि पर उषाडा गाँव के कुछ युवाओं द्वारा टैन्टों का संचालन किया जा रहा है जो कि अवैध है जबकि उषाडा के ग्रामीणों का कहना है कि तुंगनाथ घाटी के सुरम्य मखमली बुग्यालों में बाहरी पूजीपति व्यवसाय कर सकते है तो स्थानीय युवाओं के साथ भेदभाव क्यों। दोनों गांवों के ग्रामीणों में दिन भर चली वार्ता के बाद अन्त में निर्णय लिया गया कि वर्तमान समय में प्रत्येक व्यापारियों को आधे टैन्टों का संचालन बन्द करना पड़ेगा तथा आगामी 31 मार्च को स्थानीय प्रशासन के सहयोग से युवाओं के भविष्य तथा बुग्यालों के संरक्षण – संवर्धन के लिए कार्य योजना तैयार करने की गुहार लगाई जायेगी।

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