फिर अस्तित्व में आया ‘बदरी-केदार मंदिर समिति’औऱ भंग हुआ देवस्थानम् बोर्ड…

फिर अस्तित्व में आया ‘बदरी-केदार मंदिर समिति’औऱ भंग हुआ देवस्थानम् बोर्ड…
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          उत्तराखंड। उत्तराखंड के चार धामों में से दो तीर्थ बदरीनाथ और केदारनाथ की व्यवस्थाओं का जिम्मा एक बार फिर से बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ही संभालेगी। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन (निरसन) अधिनियम पर राजभवन की मुहर लगने के बाद अब दोनों ही मंदिरों के प्रबंधन के लिए पुरानी व्यवस्था बहाल हो गई है।
                   चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम के तहत गठित देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को लेकर चारधाम तीर्थ पुरोहितों के व्यापक विरोध के कारण सरकार ने अपने कदम पीछे खींचे लिए थे। विधानसभा सत्र के शीतकालीन सत्र में बीती 11 दिसंबर को इस बाबत निरसन विधेयक पारित किया गया था। राजभवन ने इस विधेयक को स्वीकृति दी है।

        विधेयक के अधिनियम बनने के साथ ही पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत संयुक्त प्रांत श्री बदरीनाथ मंदिर अधिनियम 1939 पुनर्जीवित हो गया है, जो कि देवस्थानम अधिनियम लागू होने के बाद निरस्त हो गया था। इसके साथ ही बीकेटीसी की पूर्व व्यवस्था की बहाली का रास्ता भी साफ हो गया है।

        चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम 2019 के निरस्त होने के बाद श्री बदरी-केदार मंदिर समिति अधिनियम 1939 के संख्या 16, वर्ष 1939 को एतद द्वारा पुनर्जीवित कर दिया गया है। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम् प्रबंधन (निरसन) विधेयक 2021 को सरकार द्वारा 11 दिसंबर को विधानसभा में पारित कर दिया गया। 15 दिसंबर 2021को संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन मा. राज्यपाल ने हस्ताक्षर किये। 17 दिसंबर को गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था। अपर सचिव महेश चंद्र कौशिवा द्वारा जारी गजट नौटिफिकेशन में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम् प्रबंधन ( निरसन) अधिनियम 2021 के बिंदु संख्या 01 में अधिनियम का नाम, बिंदु 02 में निरसित किये जाने की सूचना, बिंदु संख्या 03 में संयुक्त प्रांत श्री बदरी-केदार मंदिर समिति अधिनियम 1939, अधिनियम संख्या 160, वर्ष 1939 को एतद द्वारा पुनर्जीवित करने की घोषणा की है।

        बिंदु संख्या 04 निरसन एवं‌ व्यावृत्तियां में उल्लेख है कि निरसित होते हुए भी निरसित अधिनियम के अधीन किसी प्राधिकारी या किसी अधिकारी द्वारा सभी नियम, उप विधियां बनाये गये विनिमय अधिसूचना या जारी प्रमाण पत्र, पारित आदेश किये गये निर्णय की गयी कार्रवाई, जो कि इस अधिनियम के असंगत न हो प्रभावी रहेंगे तथा समस्त लंबित कार्यवाहियों का भी निस्तारण की व्यवस्था दी गयी है। इसी प्रावधान के तहत चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के निरसन से पहले उत्तराखंड चारधाम की सूचनाओं हेतु अधिकृत मीडिया प्रभारी को उत्तराखंड चारधाम यथा श्री बदरीनाथ-केदारनाथ, श्री गंगोत्री, श्री यमुनोत्री की यात्रा सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु अधिकृत समझा जायेगा। उल्लेखनीय है कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में प्रभारी मीडिया का शासन से स्वीकृत पद है।

          देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के भंग होने के बाद पू्र्ववत व्यवस्थायें बहाल हो गयी है। श्री बदरी-केदार मंदिर समिति अधिनियम 1939 अस्तित्व में आ गया है। श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ धाम की व्यवस्थायें ऐक्ट के तहत श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति संचालित करेगी, जबकि श्री गंगोत्री-यमुनोत्री धाम में स्थानीय स्तर पर व्यवस्थायें संचालित होती है।

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