ग्वारख्या उड्डयार के शैलचित्र नहीं रहे चटकदार – डॉ. दीपक सिंह कुंवर

ग्वारख्या उड्डयार के शैलचित्र नहीं रहे चटकदार – डॉ. दीपक सिंह कुंवर
0 0
Read Time:6 Minute, 48 Second

ग्वारख्या उड्डयार के शैलचित्र नहीं रहे चटकदार

पिछले 4-5 दशकों में गढ़वाल-कुमाऊँ के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रागैतिहासिक मानव की गतिविधियों के साक्ष्य मिले हैं, क्योंकि सम्भव है कि उस दौर में यहां की भौगोलिक स्थिति आदिमानव के लिये बहुत अनुकूल रही होगी। उनके निवास हेतु यहां उपयुक्त गुफा शैलाश्रय पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे होंगे। इसके अलावा खाने-पीने के लिये जंगली फल के साथ पानी भी यहां उचित मात्रा में उपलब्ध रहा होगा।

प्रौतिहासिक स्थल के परिप्रेक्ष्य में ग्वारख्या उड्डयार 

ग्वारख्या उड्डयार चमोली जनपद के अलकनंदा नदी घाटी के दांयें ओर स्थित डुंग्री गांव से एक किमी0 ऊपर चढ़ाई में स्थित पीले रंग की धारीदार चट्टान पर है, जिस पीले रंग के धारीदार चट्टान पर लाल व गुलाबी रंग से बने 41 शैलचित्र कभी लाखु उड्डयार के शैलचित्रों से ज्यादा चटकदार व गाढे़ हुआ करते थे, लेकिन ये शैलचित्र पिछले कुछ वर्षों के मुताबिक धीरे-धीरे काफी धुंधले हो चुके हैं। पुरातत्वविद् डॉ0 यशोधर मठपाल के अनुसार इन 41 शैलचित्रों में से 33 मानवों व 8 पशुओं के चित्र हैं। चित्रकला की दृष्टि से ये उत्तराखण्ड की सम्भवतः सबसे सुन्दर आकृतियां हैं।

इन आकृतियों में भेड, बारहसिंगा व लोमड़ी आदि के शैलचित्रों में से अब के भेड व कुछ बारहसिंगों के चित्र अभी भी साफ-साफ दिखाई दे रहे हैं, जबकि मानवों की आकृति त्रिशूल के आकार में धुंधली-धुंधली दिखाई दे रही है। ग्वारख्या उड्डयार के प्रागैतिहासिक शैलचित्रों को देखने से ज्ञात होता है कि इन मानवों का मुख्य विषय पशुओं को हांककर घेरना है। ग्वारख्या उड्डयार के बारे में भले ही स्थानीय लोगों को कई अरसे पहले से जानकारी थी, लेकिन दुनिया के सम्मुख इस स्थल को उजागर करने का श्रेय पुरातत्वविद् गढ़वाल विवि0 के प्रो0 राकेश भट्ट को जाता है।

डा0 यशोधर मठपाल के अनुसार- “गोरखा काल (1804-1815ई0) में नेपाली सैनिकों के एक दल ने गांवों को लूटकर यहां माल छिपाया था तथा अन्य दलों के परिचय हेतु चट्टानों पर चित्रों के रूप में लिखावट की थी। इसी लोक विश्वास के आधार पर इस चित्रित शिलापट का नाम ग्वारख्या उड्डयार पड़ा।”

हाशिए की दृष्टि पर ग्वारख्या उड्डयार

प्रागैतिहासिक स्थल ग्वारख्या उड्डयार मैं पिछले 3-4 वर्ष पूर्व अपने गुरूजी डॉ0 एस0 एस0 रावत सर व विद्यार्थियों के साथ एक ऐतिहासिक भ्रमण पर गया था। उसके बाद आज मैं एक बार फिर अपने विद्यार्थियों व श्रीमान् आर0 एस0 टोलिया जी (लीगल एडवाइजर) के साथ ग्वारख्या उड्डयार के ऐतिहासिक भ्रमण पर गया, लेकिन आज फिर पिछले वर्ष की भांति उस बीहड़ घास वाले स्थान पर 5-10 मिनट ग्वारख्या उड्डार को ढूंढ़ने में लग गये, क्योंकि ग्वारख्या उड्डयार को जाने वाले रास्ते पर स्थानीय लोगों ने पत्थरों की घेराबंदी की है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि यह प्रागैतिहासिक स्थल एक खतरे वाले स्थान पर स्थित है, जिस स्थल से नीचे 500-600 मी0 की खाई है, जहां जाने का मतलब जान को जोखिम में डालना है।

अतः आप कह सकते हैं कि प्रागैतिहासिक स्थल ग्वारख्या उड्डयार को संरक्षण के तौर पर आज भी हाशिए की दृष्टि पर रखा गया है। नहीं ग्वारख्या उड्डयार के लिए रास्ता और नहीं ग्वारख्या उड्डयार के बाहरी क्षेत्र पर सुरक्षा दीवार। अतः विदित होता है कि पुरातत्व विभाग का काम सिर्फ इन प्रागैतिहासिक स्थलों की खोज तक ही सीमित रह गया, क्योंकि अगर इन प्राचीन स्थलों को देखा जाय तो समझ में आ जाता है कि पुरातत्व विभाग ने इन स्थलों के संरक्षण के लिए कभी कोई काम नहीं किया है। संरक्षण के अभाव में ग्वारख्या उद्द्यार के गुलाबी व लाल शैलचित्रों का रंग धीरे-धीरे फीका होता जा रहा है और शिला की बाहरी परत जो पीले रंग की है वो भी अलग-अलग जगहों से टुकडे के रूप में अपना अस्तित्व खो रही है, जिस कारण से 41 शैलचित्रों में से अब मात्र 15-20 शैलचित्र ही ग्वारख्या उद्द्यार नामक प्रागैतिहासिक स्थल पर सुरक्षित रह गए हैं। अतः जैसे भी सम्भव हो हमें अपने प्राचीन धरोहरों को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ी तक इसे संजोकर रखना चाहिए।

डुंग्री गांव के स्थानीय निवासी श्री सतेन्द्र झिंकवाण जी कहते है कि – “गांव वालों को सिर्फ इतना पता है कि वहां एक ग्वारख्या उड्डयार है। इसके अलावा उसके संरक्षण या वह एक प्रागैतिहासिक स्थल है, इतना ज्यादा किसी ने कभी उस ओर सोचा नहीं। इसलिए भी कभी किसी ग्राम प्रधान ने ग्वारख्या उड्डयार के संरक्षण के बारे में ध्यान नहीं दिया।”

About Post Author

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Related Posts

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Read also x

error: Content is protected !!