गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं होहेनहाइम यूनिवर्सिटी जर्मनी के संयुक्त तत्वाधान में चल रहे पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ समापन…

गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं  होहेनहाइम यूनिवर्सिटी जर्मनी के संयुक्त तत्वाधान में चल रहे पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ समापन…
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गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं होहेनहाइम यूनिवर्सिटी जर्मनी के संयुक्त तत्वाधान में चल रहे पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ समापन…

                       श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड एलाइड साइंसेज एवं जियोलॉजी विभाग व यूनिवर्सिटी ऑफ होहेनहाइम स्टटगार्ट जर्मनी के संयुक्त तत्वाधान में चल रहे पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हुआ। इस दौरान गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं होहेनहाइम यूनिवर्सिटी जर्मनी के वैज्ञानिकों द्वारा रुद्रप्रयाग जनपद के गढ़वाल यूनिवर्सिटी के शोध केंद्रों तुंगनाथ बनियाकुंड एवं पोथीबासा का भ्रमण करने के अतिरिक्त क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं के उत्थान हेतु चल रही विभिन्न परियोजनाओं एवं विश्वविद्यालय द्वारा दी जा रही तकनीकी एवं दिशा निर्देशन को गहराई से जानने हेतु स्थानीय ग्रामीणों से वार्ता की गई| साथ ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण वनस्पतियों एवं जीव जंतुओं पर हो रहे प्रभाव को समझने का प्रयास किया गया| जर्मनी टीम से प्रोफेसर एंड्रियास द्वारा हिमालय के पारिस्थितिकी तंत्र की जटिलता एवं उसके समुचित प्रबंधन को समझने हेतु आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया| साथ ही उन्होंने कहा कि हिमालय पर अध्ययन करना उनके लिए बहुत कुछ सीखने एवं वैश्विक जलवायु परिवर्तन के दौर में हिमालय की महत्ता को समझने की जरूरत है।विशेषकर मधुमक्खियों के विभिन्न प्रजातियों के जैव विविधता को सफल बनाने में उनकी विशेष भूमिका को समझने हेतु अध्ययन करने की आवश्यकता है।

               जर्मन वैज्ञानिकों द्वारा हिमालय औषधीय पौधों के वैश्विक महत्व को स्वीकारते हुए इनका समुचित प्रबंधन एवं वैज्ञानिक विधि से उत्पादन करने पर बल दिया गया| प्रोफेसर सबीना द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही जैविक कृषि पर चल रहे प्रयासों को सराहा गया एवं जैविक कृषि उत्पादन को बढ़ाने में आधुनिक तकनीकी का समावेश करने पर जोर दिया गया सभी वैज्ञानिकों द्वारा स्थानीय कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने हेतु भविष्य में शोध कार्य करने हेतु सहमति प्रस्तुत की। वैज्ञानिकों द्वारा जनपद टिहरी के पोखाल, पाटा एवं कांडीखाल में विश्वविद्यालय के दिशा निर्देशन में चल रही गतिविधियों का निरीक्षण किया है, जिसमें विश्वविद्यालय के वानिकी विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे।

सामुदायिक वन का भी भ्रमण किया गया| पोखाल मै स्थित माउंट वैली एनजीओ द्वारा कृषि पर आधारित विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया एवं जर्मन वैज्ञानिकों द्वारा जैविक उत्पादों का लुफ्त उठाया गया|
कार्यशाला के समापन में विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रोफेसर आर सी भट्ट एवं डॉक्टर कैरोलिन द्वारा दोनों विश्वविद्यालयों के मध्य शोध एवं विकास कार्यों तथा विद्यार्थियों एवं फैकल्टी का आदान प्रदान करने हेतु एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। कृषि संकाय के डीन प्रोफेसर जे एस चौहान द्वारा बताया गया कि यह एमओयू मुख्यतः हिमालयन कृषि पारिस्थितिकी तंत्र पर आधुनिक शोध तकनीकी के माध्यम से कार्य करने हेतु किया गया है| कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर ए के नेगी द्वारा वानिकी एवं प्राकृतिक संसाधनों पर अध्ययन करने हेतु जर्मनी के होहेनहाइम विश्वविद्यालय को शीघ्र ही एक परियोजना प्रस्ताव प्रदान करने की बात कही गई| कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर आर एस नेगी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

               कार्यक्रम में प्रोफेसर आर एस राणा, प्रोफेसर जे एस चौहान, प्रोफेसर ए के नेगी, प्रोफेसर आर एस नेगी, प्रोफेसर डी एस चौहान, डॉ डी के राणा, डॉ मुनेश कुमार, डॉ जे एस बुटोला, डॉक्टर तेजपाल सिंह बिष्ट, डॉक्टर हिमशिखा गुसाईं, डॉ लक्ष्मण सिंह कंडारी, डॉ दीप्ति प्रभा, डॉक्टर बबीता पाटनी, डॉक्टर संतोष एवं वानिकी एवं कृषि संकाय के शोधार्थी एवं स्नातकोत्तर स्तर के छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थे|

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