भगवान मदमहेश्वर के कपाट आज पौराणिक परम्पराओं व वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुए शीतकाल के लिए बन्द….रिपोर्ट- लक्ष्मण नेगी

भगवान मदमहेश्वर के कपाट आज पौराणिक परम्पराओं व वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुए शीतकाल के लिए बन्द….रिपोर्ट- लक्ष्मण नेगी
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          ऊखीमठ। पंच केदारों में द्वितीय केदार के नाम से विख्यात व उच्च हिमालय श्रृंखला में विराजमान भगवान मदमहेश्वर के कपाट आज पौराणिक परम्पराओं व वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ प्रातः 8:00 बजे वृश्चिक लगन में शीतकाल के लिए बन्द कर दिये गए हैं। कपाट बन्द होने के पावन अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु साक्षी बने।

        कपाट बन्द होने के बाद भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली विभिन्न यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीष देते हुए प्रथम रात्रि प्रवास के लिए गौण्डार गाँव पहुंच गयी है तथा 25 नवम्बर को डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओकारेश्वर मन्दिर में विराजमान होगी तथा 26 नवम्बर से भगवान मदमहेश्वर की शीतकालीन पूजा विधिवत शुरू होगी। सोमवार को ब्रह्म बेला पर मदमहेश्वर धाम के प्रधान पुजारी शिव लिंग ने पंचाग पूजन के तहत भगवान मदमहेश्वर सहित तैतीस कोटि देवी-देवताओं का आवाह्न किया तथा श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर के स्वयंभू लिंग पर जलाभिषेक कर मनौती मांगी। ठीक छह बजे से भगवान मदमहेश्वर के स्वयंभू लिंग को चन्दन, भस्म, पुष्प, अक्षत्र, भृगराज से समाधि दी गयी तथा भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली का विशेष श्रृंगार किया गया। ठीक 8:00 बजे पौराणिक परम्पराओं व रीति- रिवाजों के अनुसार वैदिक मंत्रोंच्चारण के साथ भगवान मदमहेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए बन्द कर दिये गये। कपाट बन्द होने के बाद भगवान मदमहेश्वर विश्व कल्याण के लिए समाधि में लीन हो गये तथा शीतकाल के छह माह देवता भगवान मदमहेश्वर की पूजा करेंगे।


          कपाट बन्द होने के बाद भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली व साथ चलने वाले देवी-देवताओं के निशानों ने मन्दिर की तीन परिक्रमा की तथा भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली कैलाश से अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओकारेश्वर मन्दिर ऊखीमठ के लिए रवाना हुई। भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली के मैखम्भा, कूनचटटी, नानौ, खटारा, बनालोली यात्रा पड़ावों के आगमन पर श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया तथा डोली के गौण्डार गाँव आगमन पर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। मंगलवार को भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली गौण्डार गाँव से रवाना होकर द्वितीय रात्रि प्रवास के लिए राकेश्वरी मन्दिर रासी गाँव पहुंचेगी।
           इस मौके पर देव स्थानम् बोर्ड अधिकारी यदुवीर पुष्वाण, डोली प्रभारी पारेश्वर त्रिवेदी, मुत्युजय हिरेमठ, भण्डारी मदन सिंह पंवार, मुत्यु जय हिरेमठ, शिव सिंह रावत, प्रधान बीर सिंह पंवार पूर्व प्रधान भगत सिंह पंवार सहित सैकड़ों श्रद्धालु व हक – हकूकधारी मौजूद रहे।

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