सैनिक के आंखों से छलक उठे आंसू : पैतृक घर पर डोजर चलने की खबर ने की फौजी को घर आने पर मजबूर – डाॅ. दीपक सिंह कुंवर

सैनिक के आंखों से छलक उठे आंसू : पैतृक घर पर डोजर चलने की खबर ने की फौजी को घर आने पर मजबूर – डाॅ. दीपक सिंह कुंवर
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पैतृक घर पर डोजर चलने की खबर ने की फौजी को घर आने पर मजबूर

22 सितम्बर 2021 को टी0 एच0 डी0 कम्पनी द्वारा ऐतिहासिक हाट गांव में किये गये कुकृत्य ने भारतीय सीमा पर तैनात जवान को भी घर वापस लौटने पर मजबूर कर दिया, क्योकि 22 सितम्बर को वट्सअप/फेसबुक के माध्यम से फौजी को उसके पैतृक घर को कम्पनी के जेसीबी द्वारा तोड़ने की फोटो व वीडियों ने क्षुब्ध किया। तत्पश्चात 66 वर्षीय बूढ़ी मां ने फोन पर सिसकते हुए अपने इकलौते बेटे आशीष को अपने पैतृक आशियाना के बारे में व्यथा सुनाई, जिसके कारण आशीष को मां के आंसू घर आने से रोक न सके। अतः आशीष दूसरे ही दिन फौज से छुट्टी लेकर घर के लिए रवाना हो गये। ये व्यथा एक फौजी के लिए वैसे ही थी जैसे गढ़वाल के डायलन कहे जाने वाले लोकगायक श्रीमान् नरेन्द्र सिंह नेगी ने तीन दशक पूर्व अपने लोकगीत के शब्दों में एक बूढे पिता द्वारा चिट्ठी के माध्यम से बोर्डर पर रह रहे अपने बेटे के लिए लिखे थे। उसी प्रकार 22 सितम्बर को हाट गांव से एक बूढ़ी मां का बोर्डर पर तैनात अपने बेटे को फोन के माध्यम से संदेश था कि–

अबारी दॉ तू लम्बी छुट्टी लेकी आई
ऐगे बखत अखीर
हाट डूबाण लगी चा बेटा
डाम का खातिर
अबारी दॉ तू लम्बी छुट्टी लेकी आई

अगर मान लिया जाय कि ये लोकगीत उस दौर में काल्पनिक रहा हो पर आज इस अतीत के लोकगीत ने वर्तमान को परिभाषित किया है। हाट गांव के वर्तमान प्रधान श्रीमान् राजेन्द्र हटवाल बताते हैं कि आशीष अभी कुछ माह पूर्व ही अपनी छुट्टी बीताकर देश सेवा के लिए बोर्डर पर गये थे। हटवाल जी ये भी बताते हैं कि आशीष की कुछ माह बाद शादी होनी है। अतः बूढ़ी मां का इकलौता संतान आशीष अपनी शादी के लिए जेवरात बनाने व शादी से सम्बन्धित कुछ अन्य कार्य करने के लिए विगत कुछ माह पूर्व छुट्टी आए थे। आपको ये जानकर हर्ष होगा कि आशीष के पिता भी भारतीय सेना में ही सेवारत थे और एक फौजी को अपनी मातृभूमि से कितना प्रेम होता है इसे किसी को आज तक प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं पडी। अतः आशीष के पिता को अपनी जन्म भूमि से इतना लगाव था कि उन्होंने कभी भी हाट गांव से पलायन करने की नहीं सोची। अतः भारतीय सेना से रिटायर्ड होने के बाद अपने सेविंग किये गये पैसों से अपने पैतृक गांव हाट में ही घर बनाया और उसी पैतृक घर पर 22 सितम्बर 2021 को टी0 एच0 डी0 सी0 कम्पनी द्वारा जेसीबी चलाकर तोड़ दिया गया, जिस घर के टूटने के साथ ही आशीष द्वारा कुछ माह पूर्व अपनी शादी के लिए बनाए गए तीन-चार लाख रूपये के जेवरात भी दब गए। इस घटना के बाद बूढ़ी मां लोगों के घरों में रहने के लिए विवश हो गई थी।


आज जब आशीष भारतीय सेना से छुट्टी लेकर अपने पैतृक गांव हाट पहुँचे तो भावुक स्थिति में कुछ भी नहीं कह पाए। परन्तु इतना अवश्य था कि अपने साथ लाए सामाग्री को किस घर में रखूं ये सोचते-सोचते उस वीर सैनिक के आंखों से आंसू छलक रहे थे। उस वीर सैनिक की इस व्यथा को शब्दों में नहीं पिरोया जा सकता है, बल्कि सिर्फ महसूस किया जा सकता है, क्योंकि आशियाना के उजड़ जाने का दुःख आजतक एक चिड़िया ने ही महसूस किया था, लेकिन आज उस दुःख को आशीष ने भी महसूस किया। वो आशियाना कैसे बनाया होगा आशीष के पिता ने?? जिसके सन्दर्भ में–

पूछा चिड़िया से कैसे बना तेरा आशियाना
बोल पड़ी वो-
एक तिनका उठाने के लिये मीलों उड़ना होता है,
छूट गया जो तिनका, फिर से मुड़ना होता है,
पूछा वक़्त से क्यूँ है तेरी इतनी अहमियत
बोला वो-
बिना रुके मुझे चलना होता है,
ना सोना होता है, ना रोना होता है,
बंदा तो हर हाल में सही है, बस उसका वक़्त ही खराब होता है!!

विगत कुछ माह पूर्व अपनी छुट्टी पूरी कर घर से ड्यूटी पर वापस जाने वाले आशीष हटवाल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जब वह दुबारा छुट्टी घर वापस आयेगा तो वह घर जहाँ जिंदगी सदाबहार रहती थी, इस प्रकार से बिखरा रहेगा। हटवाल जी बताते हैं कि आशीष आज घर आते ही सिर्फ यही सवाल कर रहा है कि मैं अपना बैग कहां रखूं, कहां मेरी रात कटेगी, कहां मैं अपनी बूढ़ी मां को रखूं। शोकाकुल आंखों में आंसू बार-बार अपने घर को निहार रहे हैं। आशीष का परिवार विधाता से न्याय की आश पर लगे हैं।

हे विधाता- हे विधाता हमुल तेरो क्या जै क्वे
मेरि पितरो की बसायी हाट पाणि जुग्ता ह्वै,
कैकि लागी ह्वली नजर मेरि प्यारि हाट त्वै
भै-भयू से गेनि दूर स्वीणा ह्वेनि चूर-चूर.
हे बैरी विधाता बोल हमरू क्या रईं कसूर-2
कैकि लागी ह्वली नजर मेरि प्यारि हाट त्वै
मेरि पितरो की बसायी हाट
हे विधाता- हे विधाता हमुन तेरो क्या जै क्वे,
मेरि पितरो की बसायी हाट पाणि जुग्ता ह्वै।

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