असंवेदनशील होता है, हमारा समाज :- विभा नौडियाल

असंवेदनशील होता है, हमारा समाज :- विभा नौडियाल
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असंवेदनशील होता है, हमारा समाज :– विभा नौडियाल

       देहरादूननौडियाल जी बताती है कि कुछ दिन पूर्व मैंने सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर किया था, जो स्वर्गीय श्री गुंजन डंगवाल जी के पिता श्री का था। उस वीडियो में वह बता रहे हैं कि, जब गुंजन डंगवाल जी का एक्सीडेंट हुआ था तो वहां पर क्या परिस्थितियां थी और किस प्रकार से घटना घटी होगी?? इस बात को सोशल मीडिया ने बड़ी बुरी तरह से पेश किया, क्योंकि मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि से पहले मृत्यु की यह खबर सोशल मीडिया के द्वारा उनके बुजुर्ग परिजनों तक पहुंच चुकी थी। इसके साथ ही वह बताते हैं कि सोशल मीडिया ने उनके पुत्र के व्यक्तिगत जीवन पर मिर्च मसाला लगाकर इस बात खूब सुर्खियों में रखा, जब तक वह अपने घर पहुंचते, तब तक घर में सारे लोग बेहोश पड़े थे। अतः कुछ भी हो सकता था….???

     उसी प्रकार कल, कर्णप्रयाग-ग्वालदम मोटरमार्ग पर हुई दुर्घटना, सूचना तक तो ठीक है, लेकिन जब इस प्रकार की खबरों के साथ दर्दनाक फोटो शेयर किए जाते हैं तो हम यह भूल जाते हैं कि सोशल मीडिया को देखने वाले मृतकों के परिजन भी होते हैं। सूचना पहुंचाने का एक तरीका होता है। सिर्फ शेयर करना और जल्द से जल्द अपने आप को सोशली एक्टिव बना के रखना अपने व्यक्तित्व का लाइक और शेयर से आंकलन करना, कहां तक ले जाएगा आपको और हमको??? यह एक विचारणीय प्रश्न है।

हम लोग भूलते जा रहे हैं कि इस प्रकार के व्यवहार से हम स्वयं तो असंवेदनशील हो ही रहे हैं, बल्कि इसके साथ अगली पीढ़ी को भी संवेदनहीन बनाते जा रहे हैं। हम जो कुछ भी शेयर करते हैं वह किसी न किसी रूप में हमारे बच्चों के सामने आ पड़ता है। वार्तालाप के स्थान पर हम सब लोग अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहते हैं ।सभी लोग साथ रहते हुए भी एकाकी जीवन जी रहे हैं। अब तो आलम यह है कि अगर कोई एक कमरे में मृत भी पड़ा रहता है तो बगल वाले को जब तक होश आता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। सोशल मीडिया का अश्लील कंटेंट दिमाग को कुंद किए जाता है व कर रहा है। फलस्वरूप कंटेंट से प्रभावित होकर 10 साल का बच्चा बलात्कार करने लगा है, बुजुर्ग माता-पिता एकाकीपन का शिकार होते जा रहे हैं। हर वक्त मोबाइल में रहना मोटापे को न्योता दे रहा है व स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आखिर कब जागेंगे हम लोग???? ऐसा महसूस होने लगा है कि सोशल मीडिया एक नशे की तरह हमारे जीवन को प्रभावित करने लगा है । समय रहते हुए पूरे समाज को चेतना होगा।

       आइए धीरे-धीरे अपने आप को सोशल मीडिया से दूर करने का प्रयास करते हैं। कुछ घंटे अगर हम बचाकर अपने बच्चों से वार्तालाप करें उनके साथ हंसी ठट्ठा करें, बुजुर्गों से उनका हालचाल पूछे और सोशल मीडिया कंटेंट को शेयर करते हुए बुद्धिमता का परिचय दें तो यह सोशल मीडिया परिवार भी सूचनाओं के आदान-प्रदान के साथ-साथ संवेदना को समझने का एक अच्छा माध्यम बन सकता है।

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