वीरों की भूमि सल्ट के खुमाड़ में आज पांच सितंबर को मनाया जाता शहीद दिवस – चारधाम समाचार

वीरों की भूमि सल्ट के खुमाड़ में आज पांच सितंबर को मनाया जाता शहीद दिवस – चारधाम समाचार
0 0
Read Time:6 Minute, 7 Second

सल्ट के खुमाड़ में ‘शहीद दिवस’ आज

‘कुमाऊं की बारदोली’ अर्थात वीरों की भूमि सल्ट क्षेत्र व सालम में क्रांति की ज्‍वाला वर्ष 1921 से ही धधक रही थी। वर्ष 1930 में महात्मा गांधी के आह्वान पर यहां के क्रांतिकारी पं. पुरुषोत्तम, लक्ष्मण सिंह व पं. हरगोविंद पंत ने अंग्रेजी हुकूमत को लगान देना बंद कर दिया था। साथ ही गांधी जी के फरमान पर जंगलात सत्याग्रह व सविनय अवज्ञा आंदोलन के जरिये सल्ट क्षेत्र से गोरों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था। गोरों के खिलाफ जंग की ये गूंज नैनीताल कमिश्नरी से होकर दिल्ली तक जा पहुंची। फलस्वरूप देश के तमाम राज्‍यों में सल्ट क्षेत्र के वीरों की हुंकार ने स्वतंत्रता सेनानियों, खासकर युवा क्रांतिकारियों को जगाने का काम किया। तत्पश्चात स्वतंत्रता आंदोलन दबाने के लिए तत्कालीन पाली पछाऊं परगना (रानीखेत) के एसडीएम जॉनसन ने निहत्थे क्रांतिकारियों पर पहले लाठीचार्ज फिर दो बार गोलियां बरसाने का फरमान जारी किया।


उसके बाद कुमाऊं यात्रा के दौरान वर्ष 1931 में जब गांधीजी सल्ट क्षेत्र पहुंचे तो उन्होंने सल्ट क्षेत्र व सालम के सत्याग्रहियों की खूब प्रशंसा की और सल्ट क्षेत्र को ‘कुमाऊं की बारदोली’ नाम से विभूषित किया। सल्ट क्षेत्र (खुमाड़) के शहीद स्मारक में आज भी हर वर्ष 5 सितम्बर को सल्ट के रणवीरों को याद किया जाता है। सल्ट क्षेत्र के असहयोग आन्दोलन में स्थानीय कुमाउँनी कवियों ने भी ग्रामीणों के हृदय में देशप्रेम व देशभक्ति का जोश भरने का काम किया-
हिटो हो उठो ददा भुलियो, आज कसम खौंला
हम अपणि जान तक देशो लिजि द्यौंला
झन दिया मैसो कुली बेगारा
पाप बगै है छो गंगा की धारा
झन दिया मैसो कुली बेगारा
आब है गयी गांधी अवतारा
सल्टिया वीरों की घर-घर बाता
गोरा अंग्रेजा तू छोड़ि दे राजा
8-9 अगस्त 1942 ई0 में महात्मा गांधी के ‘भारत छोड़ो आंदोलन और ‘करो या मरो’ के नारे की अल्मोड़ा सल्ट क्षेत्र में जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई थी। सल्टवासियों की वीरता व एकजुटता से बौखलाकर 5 सितम्बर 1942 को अंग्रेजी हुकूमत ने एस.डी.एम. जॉनसन को विद्रोह को कुचलने के लिए सशस्त्र पुलिस बल के साथ सल्ट क्षेत्र भेजा। उसी दौरान सल्ट के खुमाड़ में भारी जन-समुदाय की मौजूदगी में आन्दोलनकारियों की एक सभा भी चल रही थी। सल्ट पहुंचकर जॉनसन ने वहां हो रही सभा में गोली चलाने के आदेश दे दिये, जिसमें खीमानंद व उनके भाई गंगाराम, बहादुर सिंह मेहरा, चूड़ामणि समेत चार लोग मौके पर ही शहीद हो गए थे। इसके अलावा गंगादत्त शास्त्री, मधुसूदन, गोपाल सिंह, बचे सिंह, नारायण सिंह आदि एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गोली चलाने के बाद जब जॉनसन घायलों के पास पहुंचा और खुमाड़ के मालगुजार पानदेव की धोती फाड़कर पट्टी बांधने लगा तो घायल बहादुर सिंह मेहरा ने गरजते हुये कहा था कि- ‘मलेच्छ तू हमें मत छू’.”
वर्त्तमान में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को जो शिक्षक दिवस मनाया जाता है, उस सन्दर्भ में यह भी उल्लेखनीय है कि व्यवसाय से शिक्षक रहे सल्ट क्षेत्र के खुमाड़ के पुरुषोत्तम उपाध्याय तथा लक्ष्मण सिंह अधिकारी के योगदान की चर्चा करना इसलिए भी आज जरूरी है, ताकि लोग जान सकें कि देश की आजादी की लड़ाई में खासकर सल्ट घटना के आन्दोलन को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में उत्तराखंड के इन देशभक्त शिक्षकों की कितनी अहम भूमिका रही थी? इसी कारण से कालांतर में पुरुषोत्तम उपाध्याय व लक्ष्मण सिंह अधिकारी को सल्ट क्षेत्र में आंदोलन को जागृति करने श्रेय दिया जाता है, जबकि हरगोविंद पन्त को सल्ट का गांधी उपनाम से जाना जाता है।
वास्तव में सल्ट के इन महान् क्रांतिकारियों ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन के इतिहास में उत्तराखण्ड का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित किया है। सल्ट क्रांति के इन सभी क्रांतिवीरों को कोटि कोटि नमन तथा 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ के अवसर पर खुमाड़ के पुरुषोत्तम उपाध्याय, लक्ष्मण सिंह अधिकारी जैसे राष्ट्रभक्त शिक्षकों को शत्-शत् नमन्

About Post Author

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Related Posts

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Read also x

error: Content is protected !!