कुंठ खाल ट्रैक: ब्रिटिश कालीन लोकप्रिय पथारोहण रूट को 5 दशक बाद पार किया स्नोलाईन ट्रैकर्स ने

कुंठ खाल ट्रैक: ब्रिटिश कालीन लोकप्रिय पथारोहण रूट को 5 दशक बाद पार किया स्नोलाईन ट्रैकर्स ने
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कुंठ खाल ट्रैक: ब्रिटिश कालीन लोकप्रिय पथारोहण रूट को 5 दशक बाद पार किया स्नोलाईन ट्रैकर्स और आइईके कोलकोता के दल ने

संजय कुँवर,जोशीमठ

लोकपाल घाटी से सटे उच्च हिमालयी क्षेत्र और विश्व धरोहर स्थल फूलों की घाटी नेशनल पार्क से गुजरने वाले ब्रिटिश काल में अंग्रेज अफसरों की सबसे लोकप्रिय साहसिक पर्यटन स्थल के रूप में विख्यात कुंठ खाल हनुमान चट्टी ट्रैक को लगभग 50 वर्ष बाद जोशीमठ के स्थानीय ट्रैकिंग कंपनी की मदद से एक कमर्शियल ट्रैकिंग दल द्वारा सफलता पूर्वक पार किया गया। “स्नो लाईन ट्रैकर्स” जोशीमठ की अगुवाई में इंस्टिट्यूट ऑफ एक्सप्लोरेशन कोलकाता के 7 सदस्यीय ट्रैकिंग अभियान दल के टीम लीडर सयंतानी महापात्रा के साथ इस रुट को पार किया गया है। बता दें की 1970 से चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी का कुंठखाल-हनुमान चट्टी पैदल ट्रैक ग्लेशियर में दबे होने से बंद था। जिसे नंदा देवी नेशनल पार्क प्रशासन ने डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां एक मीटर चौड़ा ट्रैक बनाया है।
समुद्र तल से 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुंठ खाल टॉप अपनी अदभुत छटा बिखेरती है,दल के प्रमुख गाईड और स्नोलाईन ट्रैकर्स जोशीमठ के सोहन बिष्ट बताते कि हिमालय की बर्फ़ीली वादियों में क़ुदरत का आनंद लेने के लिए ब्रिटिश अफसर यहां आते थे। अंग्रेज अफसर महीनों तक फूलों की घाटी और कुंठखाल में टेंट लगाकर यहां विश्राम करते थे।

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