भगवान तुंगनाथ यात्रा के लिए चोपता में घोड़े खच्चर संचालकों ने बनाया संगठन

भगवान तुंगनाथ यात्रा के लिए चोपता में घोड़े खच्चर संचालकों ने बनाया संगठन
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लक्ष्मण नेगी

ऊखीमठ। पंच केदारों में तृतीय केदार के नाम से विश्व विख्यात भगवान तुंगनाथ यात्रा के आधार शिविर चोपता में ईको पर्यटन विकास समिति के सहयोग से स्थानीय घोड़े खच्चर संचालकों द्वारा घोड़ा – खच्चर मालिक संगठन चोपता तुंगनाथ का गठन किया गया है। संगठन का गठन होने से अब तुंगनाथ व चन्द्र शिला जाने वाले तीर्थ यात्रियों व सैनानियों को पूर्व की भांति मुंह मांगी रकम के बजाय निर्धारित दरों पर घोड़े – खच्चर प्राप्त हो सकते हैं तथा सभी घोड़े – खच्चर संचालकों की समान आय अर्जित होगी। संगठन द्वारा पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है तथा संगठन में लगभग एक सौ घोड़े – खच्चर संचालक शामिल हैं। संगठन यात्रा भविष्य में तुंगनाथ व चन्द्र शिला जाने वाले तीर्थ यात्रियों व सैलानियों को और बेहतर सुविधा देने पर भी मंथन किया जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार पूर्व में तुंगनाथ व चन्द्र शिला जाने वाले तीर्थ यात्रियों व सैलानियों को आने जाने के लिए घोड़े – खच्चरों की मुंह मांगी रकम अदा करने पड़ती थी जिसका संज्ञान लेते हुए वर्ष 2018 में तत्कालीन जिला अधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने स्थानीय घोड़े – खच्चर संचालकों को यूनियन का गठन कर तुंगनाथ व चन्द्र शिला की दरें निर्धारित करने की सलाह दी थी। जिसका संज्ञान लेते हुए विगत दिनों ईको पर्यटन विकास समिति के सहयोग से घोड़े – खच्चर मालिक संगठन का गठन किया गया है। जानकारी देते हुए ईको पर्यटन विकास समिति के अध्यक्ष भूपेन्द्र मैठाणी ने बताया कि घोड़े खच्चर मालिक संगठन का गठन होने से तुंगनाथ व चन्द्र शिला जाने वाले तीर्थ यात्रियों व सैलानियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। तथा ईको पर्यटन विकास समिति, व्यापार मण्डल, जीप टैक्सी यूनियन व घोड़े खच्चर मालिक संगठन का मुख्य उद्देश्य चोपता – तुंगनाथ पैदल मार्ग के प्राकृतिक सौन्दर्य को यथावत रखना तथा तीर्थ यात्रियों व सैलानियों को बेहतर सुविधा देना है।

घोड़े खच्चर मालिक संगठन के अध्यक्ष वीरबल सिंह चौहान ने बताया कि संगठन द्वारा तुंगनाथ व चन्द्र शिला की दरें निर्धारित की गयी है तथा प्रत्येक तीर्थ यात्री को तुंगनाथ धाम घोड़े खच्चर से आने जाने के लिए 11 सौ रूपये अदा करना होगा तथा चन्द्र शिला जाने पर प्रति घन्टा एक सौ रूपये अतिरिक्त देय करना होगा। उपाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि संगठन द्वारा एक घोड़े खच्चर के साथ एक संचालक की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है तथा उल्लघंन करने पर घोड़े खच्चर मालिक का पंजीकरण निरस्त किया जा सकता है। सचिव लखपत सिंह चौहान ने बताया कि सभी घोड़े खच्चर संचालकों को तीर्थ यात्रियों व सैलानियों के साथ सौहार्द पूर्व व्यवहार की सलाह दी गयी है। कोषाध्यक्ष कमल सिंह चौहान ने बताया कि तीर्थ यात्रियों व सैलानियों को बेहतर सुविधा देना संगठन का मुख्य उद्देश्य है।

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