खटीमा गोलीकांड की 27वीं बरसी पर राज्य आंदोलन के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि – डॉ0 दीपक सिंह

खटीमा गोलीकांड की 27वीं बरसी पर राज्य आंदोलन के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि – डॉ0 दीपक सिंह
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खटीमा गोलीकांड की 27वीं बरसी पर राज्य आंदोलन के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि

खटीमा गोलीकांड की 27वीं बरसी खटीमा के शहीद पार्क में शहीद दिवस के रूप में मनाई गई। इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य निर्माण में शहीद हुए 7 शहीदों को पुष्प अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया। बता दें कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार खटीमा शहीद दिवस में किसी मुख्यमंत्री ने शिरकत की है।


राज्य निर्माण की मांग को लेकर 01 सितंबर 1994 को खटीमा की सड़कों पर उतरे हजारों आंदोलनकारियों पर गोलियां बरसाई गई थीं। इस दौरान सात लोगों ने शहादत दी और कई लोग घायल हुए थे।आज भी इस दिन के आते ही आंदोलनकारियों और उनके परिजनों का दर्द छलकता है।
खटीमा गोलीकांड के अमर शहीद–
1. अमर शहीद स्व0 प्रताप सिंह, खटीमा
2. अमर शहीद स्व0 सलीम अहमद, खटीमा
3.अमर शहीद स्व0 भगवान सिंह सिरौला, ग्राम- श्रीपुर बिछुवा, खटीमा
4.अमर शहीद स्व0 धर्मानन्द भट्ट, ग्राम- अमरकलां, खटीमा
5.अमर शहीद स्व0 गोपीचंद, ग्राम- फुलैया, खटीमा
6.अमर शहीद स्व0 परमजीत सिंह, राजीवनगर, खटीमा
7.अमर शहीद स्व0 रामपाल, बरेली
इस पुलिस फायरिंग में बिचपुरी निवासी श्री बहादुर सिंह और श्रीपुर बिछुवा निवासी श्री पूरनचन्द गम्भीर रूप से घायल हो गए थे।


राज्य आंदोलनकारी ओमी उनियाल बताते हैं कि उत्तराखंड राज्य निर्माण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में शहादत का सिलसिला खटीमा गोलीकांड से ही शुरु हुआ था। इसके बाद हमारे कई भाईयों ने राज्य के लिए शहादत दी, लेकिन शहीदों को आज तक न्याय नहीं मिल पाया। आंदोलन की लड़ाई के लिए जब खून बहाया जाने लगा तो वह मंजर आज भी हमें बेहद पीड़ा पहुंचाता है, लेकिन कुर्सी पर बैठे नेताओं को शहीदों के बलिदान से कोई मतलब नहीं है। अतः आज भी उनके सपनों का राज्य नहीं बन सका। इस वीभत्स कांड के 26 बरस बीत गए हैं, लेकिन आंदोलनकारी आज भी अपने सपनों के उत्तराखंड के लिए लड़ रहे हैं। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती का कहना है कि अलग राज्य का सपना तो पूरा हुआ, लेकिन राज्य गठन से पूर्व देखे गए सपने आज भी बस सपने ही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए शहादत देने वालों को सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी, जब उनके सपनों का राज्य निर्माण होगा। कहा कि आंदोलनकारियों व शहीदों के परिजनों का दर्द सरकार नहीं समझती। तभी तो इतने वर्षों बाद भी आंदोलनकारी अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।


तत्पश्चात 02 सितंबर 1994 की वह सुबह पलभर में ही कितनी दर्दनाक बन गई थी, जब 06 आंदोलनकारी मसूरी गोलीकांड में शहीद हो गए थे। उस जख्म को कोई नहीं भूल पाएगा। अलग प्रदेश के लिए मौन जुलूस के दौरान छह आंदोलनकारियों ने अपना बलिदान दिया था। आज आंदोलनकारी इस बात को लेकर खफा हैं कि उनके सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया।
मसूरी गोलीकांड के अमर शहीद–
1. अमर शहीद स्व0 बेलमती चौहान ग्राम- खलोन टिहरी
2.अमर शहीद स्व0 हंसा धनई, ग्राम-बंगधा टिहरी
3.अमर शहीद स्व0 बलबीर सिंह नेगी
4.अमर शहीद स्व0 रायसिंह बंगारी, ग्राम-तोड़ेरा टिहरी
5.अमर शहीद स्व0 धनपत सिंह, पट्टी गंगवाड़स्युं टिहरी
6.अमर शहीद स्व0 मदन मोहन ममगाई, ग्राम- नागजली मसूरी

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