गढ़वाली फ़िल्म “सुनपट” IFFI गोवा 2021 के इंडियन पैनोरामा खंड में चयनित..

गढ़वाली फ़िल्म “सुनपट” IFFI गोवा 2021 के इंडियन पैनोरामा खंड में चयनित..
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गढ़वाली फ़िल्म “सुनपट” IFFI गोवा 2021 के इंडियन पैनोरामा खंड में चयनित..

आप सभी से यह साझा करते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि हमारी गढ़वाली फ़िल्म “सुनपट” IFFI Goa, 2021 के इंडियन पैनोरामा खंड में चयनित की जा चुकी है , जहाँ चयन होना सभी भारतीय फ़िल्मकार का एक सपना होता है। इसलिए उत्तराखंड के सिनेमा के लिए आज का दिन सबसे सुनहरा दिन है, क्योंकि हमारे राज्य से हमारी भाषा की शायद यह पहली फ़िल्म होगी जो इतने बड़े भारतीय मंच से दुनिया की सबसे बेहतरीन फिल्मों के साथ साझा की जायेगी।

         गढ़वाली फ़िल्म ‘सुनपट’ उत्तराखण्ड के पहाड़ों में छुपी कई ऐसी ग़ुमनाम कहानियों और उनके किरदारों की झलक है, जिनमें से एक अहम किरदार माँ का है, जिस माँ के जीवन की अहिमियत खुद उत्तराखंड के पहाड़ भी नहीं माप पाते हैं। ये बात वो सभी गढ़वाली, कुमाउँनी व जौनसारी लोग समझते हैं, जिनका संबंध उत्तराखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से रहा है। अतः माँ के जीवन की समस्याओं की सूची बनाने के लिए दुनिया के हर मंच या स्तर, सब छोटे हैं।


            ‘सुनपट’ गढ़वाली फ़िल्म में मां के किरदार में चंदा है, जिनकी असल ज़िंदगी से ज्ञात होता है कि पहाड़ों में जितना संघर्ष माँ का है उतना किसी का नहीं। सिलेंडर का वजन 30 किलो होता है, जिसे अगर आप 5-10 मिनट तक उठा लें तो आपको उसके भारीपन का पता चल जाता है। शहरों में सिलेंडर को आपके घर साइकिल या रिक्शा में पहुँच जाता है, लेकिन पहाड़ों में पहिये नहीं चलते। इसलिए पहाड़ों की स्त्रियाँ इसे अपने सर पर स्वयं रखकर घर तक ले जाती हैं, जिनमें से कुछ रास्ते 4-5 किमी० तक की चढ़ाई चढ़ करके तय किए जाते हैं, जैसे कि फ़िल्म ‘सुनपट’ में चंदा के सिर पर रखा सिलेंडर पहाड़ में महिलाओं की दशा को वर्णित करता है

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