गैरसैंण में आज एनएसयूआई ने किया लॉन्च ‘शिक्षा बचाओ देश बचाओ अभियान’….रिपोर्ट – ‘सूर्यप्रकाश पुरोहित’

गैरसैंण में आज एनएसयूआई ने किया लॉन्च  ‘शिक्षा बचाओ देश बचाओ अभियान’….रिपोर्ट – ‘सूर्यप्रकाश पुरोहित’
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         नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने आज 16 नवम्बर को गैरसैंण (चमोली) में एक प्रेस वार्ता गठित की, जिसमें उन्होंने राज्य में ‘शिक्षा बचाओ देश बचाओ अभियान’ की शुरुआत की।

           NSUI के अनुसार- नई शिक्षा नीति, केंद्रीकरण व शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देती है। साथ ही यह शिक्षा विरोधी नीति तब लायी गयी, जब पूरे देश में कोविड-19 के कहर का दौर था। अतः इससे उद्देश्य साफ नज़र आता है कि मोदी सरकार शिक्षा के ढांचा को सिर्फ अमीरों के लिए एक सुविधा जैसी इकाई बनाना चाहती है, जो कि गरीब बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। अतः इसको मध्य नज़र रखते हुए एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष मोहन सिंह भंडारी ने आज गैरसैंण में ‘शिक्षा बचाओं देश बचाओ अभियान’ को लॉन्च किया।

         एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष मोहन भंडारी का कहना है किबीजेपी सरकार के निजीकरण की नीति के चलते देशभर में नौकरियां, आरक्षण व आने वाली पीढ़ी का भविष्य सब बर्बाद होता जा रहा है। फलस्वरूप सरकारी संस्थानों के निजीकरण से देश के युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर खत्म होते जा रहे हैं। यहाँ तक की अब नई शिक्षा नीति भी निजीकरण को बढ़ावा दे रही, जिसका सीधा असर देश के गरीब तबके पर पड़ रहा है। अतः गरीब जाए तो जाए कहाँ??

        आगे कहते हैं किआए दिन लगातार SSC, NEET, JEE जैसे सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में घोटाले सामने आना व युवाओं को वर्षों तक नौकरी न देना, साफ झलकाता है कि मोदी सरकार छात्र-छात्रा विरोधी सरकार है। अगर हम छात्र वर्ग के लिए कोई नीति बना भी रहें हैं तो हमारा कर्तव्य बनता हैं कि हम उनसे चर्चा करें, लेकिन वर्तमान सरकार की अब प्रकृति बन चुकी है कि सभी कार्य तानाशाही तरीके से लागू किए जाए।

            भंडारी ने ये भी कहा कि- जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई हैं तब से छात्रों की फैलोशिप एवं स्कॉलरशिप रोकी जा रहीं हैं, प्रवेश परीक्षाओं में घोटाले हो रहें हैं तथा परीक्षाओं के परिणाम देरी से आ रहे हैं, जिसके चलते छात्र-छात्राओं के जीवन के कुछ अमूल्य वर्ष ऐसे ही बर्बाद हो जा रहे हैं।

          अतः एनएसयूआई केंद्र सरकार से मांग करती हैं कि- केंद्रीय स्तर एवं प्रदेश स्तर पर छात्र- छात्राओं को वर्तमान प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में कम से कम 2 साल की छूट दी जाएं, क्योंकि कोरोना संक्रमण के चलते छात्र-छात्राओं के 2 साल पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।
       आगे ये भी बताया कि- उत्तराखंड में भी सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति को इस सत्र से लागू करवाने की बात की गई है, जिसका एनएसयूआई पूर्ण रूप से विरोध करेगी, जब तब उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा विवादस्पद नीति को सही ढंग से नहीं सुधारा जाता तब तक एनएसयूआई इसका पूरा विरोध करेगी।

                मोहन सिंह भंडारी ने आगे यह भी कहा किएनएसयूआई अपनी मांगों को लेकर 19 तारीख को गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र का घेराव करेगी और मांगें पूरी न होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाएगी।
इस प्रेस वार्ता में पूर्व राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप कुंवर, दीक्षा कंडारी, कुलवीर कुंवर, राकेश रावत, मुकेश बिष्ट, अनिल बिष्ट, रवींद्र रावत, विजय नेगी, अरुण बिष्ट, संजय सिंह रावत आदि मौजूद रहे।

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