सामाजिक कार्यक्रम से पिछड़े नगर मतदान प्रतिशत में भी कम होते हैं :- डॉ० दीपक सिंह

सामाजिक कार्यक्रम से पिछड़े नगर मतदान प्रतिशत में भी कम होते हैं :- डॉ० दीपक सिंह
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सामाजिक कार्यक्रम से पिछड़े नगर मतदान प्रतिशत में भी कम होते हैं :- डॉ० दीपक सिंह

            गोपेश्वर। गोपेश्वर नगरपालिका  परिषद के अध्यक्ष पद के लिए हुए उपचुनाव में कम मतदान प्रतिशत से कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। कम या ज्यादा मतदान का राजनीतिक दलों की संभावनाओं के साथ सीधा संबंध है या नहीं, यह एक विवादास्पद मुद्दा है।

आपको बता दें कि नगर पालिका परिषद गोपेश्वर में अध्यक्ष पद के उपचुनाव में 34.85 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट किया।

             गोपेश्वर नगर पालिका में 6,580 पुरूष तथा 6,323 महिला मतदाता सहित कुल 12,903 मतदाता थे, जिसमें से 2122 महिला तथा 2375 पुरूष सहित कुल 4497 मतदाताओं ने मतदान किया, जबकि नगर निकायों के वर्ष 2018 में हुए सामान्य निर्वाचन में नगर पालिका परिषद गोपेश्वर में 59.27 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें 3833 महिला तथा 3813 पुरूष सहित कुल 7646 मतदाताओं ने मतदान किया।

लोगों का मानना है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश व चारधाम यात्रा में व्यस्तता के चलते मतदान प्रतिशत में कमी आई है। भले ही मतदान प्रतिशत में कमी आने के अनेक कारण हैं।
इतना अवश्य जान लीजिए कि मजदूरी और रोजगार में वृद्धि मतदाता को कम करती है। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है, क्योंकि गाँव में हमेशा से नगरों की अपेक्षा ज्यादा मतदान होता है। अगर नगरपालिका चुनाव गोपेश्वर के पोलिंग बूथ सूची को देखें तो साफ समझ में आता है कि सगर गांव के पोलिंग बूथ के मतदान की अपेक्षा गोपेश्वर नगरों के पोलिंग बूथ पर मतदान आधे से भी कम हुआ है, क्योंकि नगरों में रहने वाले सरकारी नौकरी पेशे वाले मतदाता या धनाढय वर्ग के मतदाता कभी भी पोलिंग बूथ पर खड़े होना नहीं चाहते हैं। उन्हें लगता है कि उनका ऐसा खड़े होने से उनका रुतबा कम होता है। इसलिए भी नगरों में मतदान प्रतिशत कम होता जा रहा है।

भले ही लोगों का मानना है कि आम मतदाताओं का सरकार और राजनेताओं पर भरोसा कम हो जाना भी मतदान प्रतिशत में कमी आना है। उनका मानना है कि नगरों में रहने वाले लोग नेताओं व सरकार से वाक़िफ़ रहते हैं, जबकि ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले मतदाता इस बात से कम वाक़िफ़ रहते हैं। अतः इसलिए भी शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत ज्यादा रहती है।

इतना अवश्य समझ लीजिए कि ऐसे नगर सामाजिक कार्यक्रमों में भी पिछड़े रहते हैं, क्योंकि आँकड़े बताते हैं कि सबसे व्यापक सामाजिक कार्यक्रमों वाले नगर सबसे अधिक मतदान वाले नगर होते हैं। अतः गोपेश्वर नगर को आप सामाजिक सरोकार से पिछड़ा नगर भी मान सकते हैं। कहने के लिए तो कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन आंकड़े आपको हमेशा सब कुछ बताते हैं।

एक तरफ जहां मतदाताओं का अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग न होना इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है, तो कई बार वोटर राजनीतिक कारणों से तो कई बार सामाजिक कारणों से भी वोट डालने नहीं जाते हैं। तो कई बार ‘देयर इज नो अल्टरनेटिव फैक्टर’ भी काम करता है। मतलब जब हम ये मान बैठते हैं कि किसी पार्टी और नेता का इस समय कोई विकल्प ही नहीं है तो लगता है कि जीतेगी तो वही पार्टी। ऐसे में लोग वोट डालने नहीं जाते हैं। कम मतदान होने के संदर्भ में लोग मतदाताओं की उदासीनता की बात करते हैं, लेकिन अब तो नोटा है। मतदाताओं को अधिकार है कि वो प्रत्याशी और पार्टी को रिजेक्ट कर सकते हैं।

ओवरऑल वोटिंग परसेंटेज पिछले चुनाव के मुकाबले लगभग 25 फीसदी कम है। ऐसे में घटते-बढ़ते वोटिंग प्रतिशत को लेकर लोगों ने गणित लगाना शुरू कर दिया है। ज्यादातर लोग कहते हैं कि बढ़ी हुई वोटिंग सत्ता के खिलाफ नाराजगी होती है, जबकि घटी हुई उसके समर्थन में, लेकिन राजनीतिज्ञ बता रहे हैं कि घटे या बढ़े मतदान प्रतिशत का सत्ता विरोधी या सत्ता के पक्ष में कोई कनेक्शन समझ में नहीं आता है। अतः अब १४ जून को ही ज्ञात होगा की कौन प्रत्याशी जीता और कौन हारा, क्योंकि कम मतदान प्रतिशत केवल एक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों के प्रति निराशा का संकेत है।

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One thought on “सामाजिक कार्यक्रम से पिछड़े नगर मतदान प्रतिशत में भी कम होते हैं :- डॉ० दीपक सिंह

  1. अत्यंत सोचनीय एवं विचारणीय …..हम अपने अधिकारों की बात टी करते हैं पर कर्तव्य भूल जाते हैं …..😟

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