जनता की अदालत में सरकार हार गई, धामी ने देवस्थानम बोर्ड को भंग करने का किया एलान… रिपोर्ट-संजय कुँवर

जनता की अदालत में सरकार हार गई, धामी ने देवस्थानम बोर्ड को भंग करने का किया एलान… रिपोर्ट-संजय कुँवर
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       जोशीमठ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर त्रिवेंद्र सरकार का फैसला पलट दिया। धामी ने बड़ा फैसला लेते हुए देवस्थानम बोर्ड को भंग करने का एलान किया। दो साल पहले त्रिवेंद्र सरकार के समय चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड अस्तित्व में आया था। तीर्थ पुरोहितों, हक-हकूकधारियों के विरोध और कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बोर्ड को मुद्दा बनाने से सरकार पर दबाव था।

 

       पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वर्ष 2019 में श्राइन बोर्ड की तर्ज पर चारधाम देवस्थानम बोर्ड बनाने का फैसला लिया था। तीर्थ पुरोहितों के विरोध के बावजूद सरकार ने सदन से विधेयक पारित कर अधिनियम बनाया। चारधामों के तीर्थ पुरोहित व हकहकूकधारी आंदोलन पर उतर आए, लेकिन त्रिवेंद्र सरकार अपने फैसले पर अडिग रही।

         सरकार की इस घोषणा से पंडा पुरोहित उत्साहित वह गदगद है। उनके अनुसार सरकार ने उनकी बहुप्रतीक्षित मांग को माना है। ऐसे में वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के गठन का निर्णय ही गलत था। वहीं विपक्ष ने इसे राजनीतिक फैसला करार देते हुए कहा कि सरकार जनता की अदालत में हार चुकी है।

                  चारधाम तीर्थ पुरोहित हक-हकूकधारी महापंचायत के अध्यक्ष कृष्णकांत कोटियाल ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड का निर्णय ही गलत था। कहा कि चारों धामों, तीर्थों, मंदिरों की परंपराओं व मान्यताओं के विपरीत सरकार ने एकतरफा निर्णय लेकर देवस्थानम बोर्ड बनाया। कहा कि हम सत्य की लड़ाई लड़ रहे थे। कहा कि आखिरकार सत्य की जीत हुई है। पंडा पंचायत बदरीनाथ के अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड को भंग होना तीर्थ पुरोहितों, हक हकूकधारियों की एकतरफा जीत है। तीर्थ पुरोहित बृजेश सती ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलेंगे कि जब कोई निर्वाचित सरकार किसी विधेयक को विधानसभा से ध्वनिमत से पारित करे और वहीं सरकार अपने बनाए हुए अधिनियम को वापस ले। निश्चित रूप से यह एक ऐतिहासिक घटनाक्रम है और इस साहसिक कदम उठाने में युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जो पहल की है और निश्चित स्वागत योग्य कदम है।
कहा कि चारों धामों के तीर्थ पुरोहित पिछले 734 दिनों से निरंतर धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन कर रहे थे। सरकार ने देर से ही सही चारों धामों के तीर्थ पुरोहितों की भावनाओं को समझा। उत्तराखंड राज्य प्राप्ति आंदोलन के बाद सबसे लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन रहा।

            ब्रहमकपाल तीर्थ पुरोहित संघ के अध्यक्ष उमेश सती ने कहा कि आज का दैनिक सनातन धर्म के लिए ऐतिहासिक दिन है। इसलिए चारों धामों के तीर्थ पुरोहित इस दिन को हमेशा के लिए याद रखेंगे जिस तरह से राज्य से मंदिर मुक्ति की आंदोलन की शुरुआत में निश्चित रूप से भविष्य में देश के अन्य राज्यों में भी मंजू के मुख्य के अभियान को गति मिलेगी। इधर,सरकार द्वारा देवस्थानम बोर्ड भंग करने की घोषणा को विपक्ष ने चुनावी शिगूफा बताया।

       पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि यह तीर्थ पुरोहितों का संघर्ष व कांग्रेस के सहयोग की जीत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह राजनीतिक फैसला लिया है। जब भाजपा सरकार को आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी नैया डूबती नजर आई तो तब यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि तीर्थ पुरोहितों ने अपने हक हकूकों व परंपराओं को लेकर आंदोलन किए, डंडे खाए, सरकार ने उनका उत्पीड़न किया। कहा कि जनता की अदालत में सरकार हार गई है।

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