60 भाइयों में जेष्ठ भ्राता वजीर देवता एवं बेमरू लाटू के सानिध्य में द्योखारी पट्टी की जात नन्दीकुंड में सप्तमी तिथि को…रिपोर्ट:- रघुबीर नेगी

60 भाइयों में जेष्ठ भ्राता वजीर देवता एवं बेमरू लाटू के सानिध्य में द्योखारी पट्टी की जात नन्दीकुंड में सप्तमी तिथि को…रिपोर्ट:- रघुबीर नेगी
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60 भाइयों में जेष्ठ भ्राता वजीर देवता एवं बेमरू लाटू के सानिध्य में द्योखारी पट्टी की जात नन्दीकुंड में सप्तमी तिथि को...रिपोर्ट:- रघुबीर नेगी

      चमोली/उर्गम घाटी60 भाइयों में जेष्ठ भ्राता वजीर देवता एवं बेमरू लाटू के सानिध्य में द्योखारी पट्टी की जात नन्दीकुंड में सप्तमी तिथि को होगी। वैसे तो नन्दीकुड की जात हमेशा अष्टमी को होती है, लेकिन इस बार रविवार को अष्टमी तिथि होने के कारण सप्तमी को ही नन्दा की जात नन्दी कुंड में हो रही है। जेष्ठ भ्राता डुमक वजीर के सानिध्य में डुमक, स्यूंण, बेमरु, हाट, जैसाल, कुजों, कांणा, खंडरा, देवर, खडोरा, डुंग्री के गांवों की आज वजीर देवता एवं बेमरु लाटू की अगुवाई में ढोलडार मनपाई बुग्याल में रात्रि विश्राम कर सुबह 3 सितम्बर को घोड़ा सागड़ा, कैला विनायक, बाड़ा वैतरणी, घिया विनायक की कठिन चढ़ाई पार कर 17500 फीट धणियां डुंकर चनणियां घट होते हुए नन्दीकुंड पहुंचकर मां नन्दा के जागरों के माध्यम से आवाह्न किया जायेगा।

बजीर देवता सबसे पहले खड्ग आसन लेंगे, उसके बाद सभी अवतरित पश्वा आसन लेंगे। मां नन्दा देवी की शक्ति पीठ में सभी खड्ग आसन लेते हैं। मां नन्दा की जात कर नन्दा को मायके के लिए आमंत्रित कर वापस रात्रि विश्राम मनपाई बुग्याल ढोलडार में करेंगे। अगले दिन सभी वजीर देवता के मंदिर में पहुंचकर रात्रि विश्राम कर सुबह सभी छतोलियां अपने अपने गांवों में पहुंच जायेगी।

4 सितम्बर को सभी छंतोली अपने अपने स्थान को लौट जायेगी । उर्गमघाटी की छतोलियां फुलाणा पहुंचेगी जहां मां नन्दा का भोग तैयार किया जायेगा। शाम 5 बजे सभी छतोलियां उर्गम घंटाकर्ण मंदिर में पहुंचेगी जहां सभी भक्तों को प्रसाद ब्रह्म कमल वितरण किया जाएगा। नन्दा स्वनूल देवी मायके पहुंचेगी ।

मैनवाखाल की जात उर्गम थात एवं पंचगै

भूमिक्षेत्र घंटाकर्ण की अगवानी में रिखडारा उडियार में रात्रि विश्राम के बाद उर्गम घाटी की छतोलियां जिसमें सलना ल्यांरी थैणा बडगिण्डा देवग्राम गीरा बांसा समेत भूमिक्षेत्र पाल कलगोठ कोंधुडिया पंचगै पल्ला जखोला किमाणा कलगोठ लांजी पोखनी द्वींग तपोण की छतोलिंया के साथ सुबह 3 सितम्बर को मैनवाखाल में मां नन्दा की जात की होगी मैनवाखाल में मां नन्दा को जागरों के माध्यम से आवहृन किया जायेगा पुष्प वाटिका से ब्रह्म कमल तोड़कर सभी छतोलियां रात्रि विश्राम पुनः रिखडारा उडियार में पहुंचेंगी। यहां रात्रि में मां स्वनूल देवी का मायके उर्गम के लिए जागरों द्वारा आमंत्रित किया जायेगा चार सितंबर को दोनों बहनें फुलाणा पहुंचेगी, जहां पर छानियों में रहने वाले लोगों मरूड़ियों द्वारा पाऊ यानि धियाण को भोज दिया जायेगा। पंचगै की छंतोलिया कलगोठ होते हुये अपने अपने गांवों को लौट जायेगी।

मां स्वनूल देवी सुनन्दा की जात भनाई बुग्याल

मां स्वनूल की जात भूमिक्षेत्र पाल भर्की धनाणधोण के सानिध्य में 11 छंतोली पल्ला उर्गम सहित शाम चार बजे फ्यूलानारायण में रात्रि विश्राम कर सुबह प्रस्थान कर भनाई बुग्याल में भगवती स्वनूल देवी की जात कर भगवती को सोना शिखर से बुलाया जायेगा मां भगवती की पुष्प वाटिका से ब्रह्म कमल चुनकर सभी छंतोलिया फ्यूलानारायण मंदिर में पहुंच कर रात्रि विश्राम कर सुबह भर्की चोपता से अपने अपने गांवों को लौट जायेगी।

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