राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी देवी ने किया शिव स्वरूप धारण …

राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी देवी ने किया शिव स्वरूप धारण …
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राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी देवी ने किया शिव स्वरूप धारण …

                जोशीमठ। शंकराचार्य मठ ज्योतिष्पीठ में अखिल कोटि ब्रह्मांड नायिका राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी देवी का भव्य श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि शिव आराधना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि है।

               शिवपुराण की कोटि रुद्र संहिता में इस पर्व को विस्तार से बताया गया है। कहा कि वैसे प्रचलित अर्थ में रात्रि तात्पर्य सूर्य किरणों की अनुपस्थिति वाले काल से है पर महाशिवरात्रि, नवरात्रि आदि शब्दों में उच्चरित रात्रि शब्द का तात्पर्य राति ददाति शुभम् अवसरं इति रात्रि: ही होता है। इसका मतलब भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का अवसर देने वाला महान पर्व। इस दिन शिवरात्रिव्रतं ह्येतत् करिष्येऽहं महाफलम्। निर्विघ्नमस्तु मे नाथ त्वत्प्रसादाज्जगत्पतेकहकर संकल्प करें। फिर व्रतपूर्वक शिव पूजा करें तो भगवान शिव अवश्य अभीष्ट फल प्रदान करते हैं। मठ में स्थित तोटकाचार्य महाराज की गुफा में विराजमान ज्योतिरीश्वर महादेव का रात्रि के चारों प्रहर महापूजा व दूध से अभिषेक किया गया।

          इस मौके पर दंडी स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती महाराज, विष्णुप्रियानन्द ब्रह्मचारी, कुशलानन्द बहुगुणा मौजूद रहे।

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