झोड़ा गीत “अल्मोड़ा अंग्रेज आयूं” ओल्ड हुआ गोल्ड :- प्रदीप बिष्ट।

झोड़ा गीत “अल्मोड़ा अंग्रेज आयूं” ओल्ड हुआ गोल्ड :- प्रदीप बिष्ट।
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झोड़ा गीत “अल्मोड़ा अंग्रेज आयूं” ओल्ड हुआ गोल्ड :- प्रदीप बिष्ट।

         गोपेश्वर। आजकल पहाड़ में एक गीत (झोड़ा) नीरज चुफाल और खुशी जोशी का “अल्मोड़ा अंग्रेज आयूं” ने खूब धूम मचा रखी है। झोड़ा नृत्य की गायन शैली धार्मिक, श्रृंगार और सामाजिक होती है। हास्य व्यंजना, मनोरंजन और कौतूहल से सम्बंधित गीतों को झोड़ो में गाया जाता है।

झोड़ा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के झटति से मानी जाती है। इसमे पद संचालन और लय दोनों तेज होते हैं।

        कुमाऊं में झोड़ा गीतों के दो रूप प्रचलित हैं – मुक्तक और प्रबंधात्मक झोड़े । मुक्तक झोड़े चाचरी ही होती हैं। और प्रबंधात्मक झोड़ो में लोकदेवी देवताओं और ऐतिहासिक महापुरुषों के गुणगान होते हैं।

        सामूहिकता एवं साहचर्य के साथ झूमते पहाड़ की झोड़ा लगाने की सदियों पुरानी परंपरा समय के साथ पहाड़ में होने वाले सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों को भी अभिव्यक्त करती रही है।
अल्मोड़ा में अंग्रेज का टैक्सी में आना तब कौतुहल तो था ही ,आखिर बिन टैक्सी के भी तो अंग्रेज को देख आंखें झूमती ही हैं और पहाड़ में टैक्सी और उस पर अंग्रेज, रगर्याट तो होना ही हुआ। अंग्रेजों और अंग्रेजियत का पहाड़ पर वैसे भी गहरा प्रभाव रहा है। पहाड़ में बारात किसी जमाने में ढोल के उतराई और चढाई के बाजों के सहारे मंजिल तय करती थी ,पहले पहल टैक्सी में आई बरात के दिदार की कहानी इतिहास तो बननी ही थी। आखिर दूल्हे से ज्यादा तो टैक्सी ही सजी थी।

        याद कीजिए ज्यादा वक्त नहीं हुआ जब हर नई कच्ची रोड का टैक्सी ड्राइवर इलाके का हीरो होने वाला ठैरा और फौजी भाई के बगैर तो शायद ही पहाड़ की कोई कहानी पूरी हो पाये, जो भी हो पहाड़ ने न जाने कितनी यात्रायें पूरी की हैं और आज भी आगे बढ रहा है अपने ईष्ट का नाम लेकर। पहाड़ के लोकसंगीत में निश्चित ही पहाड़ थिरकता है और जीवंत हो उठता है।
               झोड़ा उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक नृत्य है, जिसमे स्त्री व पुरुष सामुहिक रूप से भाग लेते हैं।हमारे पड़ोसी देश नेपाल में भी ऐसे ही लोकनृत्य का आयोजन किया जाता है, जिसे हथजोड़ा कहते हैं। इस प्रकार इसका मतलब हुआ हाथों को जोड़कर किया जाने वाला नृत्य ।
           झोड़ा नृत्य में हाथों में हाथ डालकर ,उन्मुक्तता के साथ निश्चित गति और लय पर एक खास शैली के साथ ,गोलाकार घेरे में नृत्य करने वाले पुरुष व महिलाएं ,हुड़के की थाप पर इस लोकनृत्य का आयोजन करते हैं। यह एक सामुहिक नृत्य है। चैत्र मास में तथा मेलों और शुभ धार्मिक कार्यों ,विवाह आदि के अवसर पर झोड़ा नृत्य का आयोजन किया जाता है। अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर घाटी और बोरारो घाटी के झोड़े बहुत प्रसिद्ध हैं।

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