नीरस जीवन में रस भरना नीरस व्यक्ति के लिए पीड़ा होता है..डॉ०दीपक सिंह

नीरस जीवन में रस भरना नीरस व्यक्ति के लिए पीड़ा होता है..डॉ०दीपक सिंह
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नीरस जीवन में रस भरना नीरस व्यक्ति के लिए पीड़ा होता है… डॉ०दीपक सिंह

बचपन में जब दूर से गाड़ी आती, हॉर्न बजाती
तब हम गाड़ी के पीछे दौड़े चले जाते
और गाड़ी को टाटा करके घर आ जाते
काश जीवन में एक रिवाइंड बटन लगा पाते

माँ चूल्हे में फूंक मारते-मारते खाना पकाती
तब हम स्कूल से दौड़े चले झौली भात खाते
उन दिनों को अब याद करते हम बचपन में पहुंच जाते
काश जीवन में एक रिवाइंड बटन लगा पाते

मॉं त्यौहार के दिन पूरी-पकौड़ी बनाती
और पितृ पूजन के लिए घर के कौने में चली जाती
तब हम चुपके से पकौड़ी चोर के अँधेरे कौने में खाते
और मुँह पोछते हुए बाहर आते
काश जीवन में एक रिवाइंड बटन लगा पाते

हम उन दिनों हिसोल-किरमोड ले आते
काफल के पेड़ में चढ़ जाते
और फिर बंगजीरे के नमक के साथ खाते
काश जीवन में भी एक रिवाइंड बटन लगा पाते।

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